Time to be alert for the future

भविष्य के लिए सचेत होने का समय

दिसंबर जनवरी का महीना विद्यार्थी के लिए खास अहमियत रखता है यह वही समय होता है जब बोर्ड और वार्षिक परीक्षाएं आने की आहट दे रही होती हैं।परीक्षा में आपकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अपने वर्ष भर जो तैयारी कि उसे अंतिम समय में कैसे धार देते हैं और परीक्षा हाल में प्रदर्शन कैसे करते हैं? बोर्ड परीक्षा की तैयारी रहे छात्रों को धैर्य और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाना है। परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर ही आपका भविष्य ,कोर्स ,कैरियर सब टिका है।लिहाजा किसी भी प्रकार की गलती करने से बचें जहां जरूरत हो शिक्षकों और परिजनों का पूरा सहयोग ले अगले दो-तीन महीने में ही बोर्ड परीक्षा के अलावा ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे छात्रों की भी वार्षिक परीक्षाएं होंगी। ऐसे छात्रों को भी अलग-अलग स्तरों पर तैयारी की जरूरत है।

 

खुद के लिए तय करें लक्ष्य

 

किसी भी वांछित मुकाम पर पहुंचने के लिए जरूरी है कि आपका लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट हो। लक्ष्य की अस्पष्टता हमारे तैयारी में बाधक बन जाती है। किसी को देखकर अगर आप लकीर के फकीर बन रहे हैं तो यह समस्या आप की है।किसी और की नहीं हो सकता है कि लोग आपसे सवाल पूछे अब आगे क्या करेंगे? कहां पढ़ोगे आदि आदि। बेहतर है कि आप अभी ही खुद से कुछ सवाल पूछना शुरू कर दीजिए। इन सवालों को मैं ,पंच ककार, कहता हूँ ये इस प्रकार हैं क्यों? क्या?कहां? कैसे? कब?

किसी भी विद्यार्थी को यह को अच्छी तरह समझना चाहिए कि वह क्यों पड़ रहा है? घरवालों की इच्छा के लिए ! शर्मा जी का बेटा पड़ रहा है इसलिए या आप अपने लिए अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए।उसका क्यों जितना ही अस्पष्ट होगा उतना ही ज्यादा अध्ययन के प्रति समर्पण होगा।

 

आपका उद्देश्य स्पष्ट हो

 

पढ़ने का उद्देश्य स्पष्ट होने पर ही विद्यार्थी यह जानने के लिए उत्सुक होगा कि अब क्या पढ़ा जाए। यह क्या का प्रश्न ही उसकी दिशा तय करने में बहुत सहायक है। फिर चाहे मामला किसी विषय पढ़ने का हो या कोई कोर्स ।क्या प्रश्न उसके अंतस को समझने में भी मददगार होता है। उसे देखना चाहिए कि कहीं ऐसा तो नहीं कि जो कोर्स वह पढ़ रहा है उसमें उसका मन नहीं लगता। मन और बुद्धि के सामंजस्य से ही ज्ञान का आलोक फैलता है। अध्ययन बोझ का विषय ना होकर आनंद का हेतु बने या जरूरी है।

 

समझ — बूझकर करें फैसला

 

तीसरा सवाल खड़ा होता है कि वांछित कोर्स कहां से करें? देश विदेश में किसी भी कोर्स के लिए सैकड़ों संस्था है विद्यार्थी को चाहिए कि गुणवत्ता, प्रतिष्ठा, फिश और अपनी सक्षमता के आधार पर चिन्हांकित संस्थानो के लिए ही कोशिश करें।के जाना कहां है।तय करने के साथ ही ‘ कैसे ‘ पहुंचे का प्रश्न महत्वपूर्ण हो जाता है।लक्ष्य हासिल करने के लिए शॉर्ट– कट के फेड़ में नहीं पड़ना चाहिए। क्योंकि यह तो जरूर है कि शॉर्ट– कट दूरी घटाती है पर मंजिल तक पहुंचा दे यह कतई जरूरी नहीं।इसलिए विशेषज्ञों से विधिवत मार्गदर्शन लेकर व्यापक तैयारी शुरू करें। पिछले वर्ष के प्रश्न पत्रों का विश्लेषण करें परीक्षा की प्रकृति को बारीकी से समझें।स्वमूल्यांकन करते हुए स्वयं में अपेक्षित सुधार करें।

 

जब जागो तभी सबेरा

 

आखरी सवाल जो शुरू से ही बेहद महत्वपूर्ण है की तैयारी कब से आरंभ की जाए ? प्रसिद्ध लोकोक्ति है जब जागो तभी सवेरा।इसका मतलब यह हुआ के आज और अभी से ही लक्ष्य के प्रति सचेत हो जाएं अभी और से ससत रूप से विद्यार्थी अगर इस पंच ककार पर विचार करते हुए गहन अध्ययन में प्रवृत्त हो जाए।तो सफलता कब मिलेगी ये अनिश्चित नहीं रह पाएगा। वह दिन प्रतिदिन सफलता के और करीब होते जाएंगे। विपरीत परिस्थितियां आएगी अत्यधिक ठंड ,मोबाइल ,इंटरनेट आदि वाहन तत्व आपके सुनियोजित अध्ययन में बाधक हो सकते हैं।

पर निराश नहीं होना चाहिए और ऐसे कष्ट समय का डटकर सामना करना चाहिए तभी कामयाबी हमारी कदम चूमेगी।

नोट :– अगर हम शुरू में ही यह तय कर ले कि हमें क्या करना है,क्या पढ़ना है और क्या बनना है तो सही समय में भविष्य का निर्णय लेने में परेशानी नहीं होगी।

 

2 Comments on “Time to be alert for the future”

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