Positive Information for Health

Sometimes you can take an overdose of positive information, it can make us healthy ( कभी-कभी ले सकते हैं पॉजिटिव इनफार्मेशन का ओवरडोज यह हेल्दी बना सकता है हम सब को)

 

यह बात मैं इसलिए बोल रहा हूं कि जहां भी देखो आज अखबार में, न्यूज़ में सोशल साइट पर कोरोना के बारे ही कहा जा रहा है। लोग मर रहे हैं। परेशान हो रहे हैं। यह सब सुन सुन के दिमाग खराब हो गया है और डर भी लगता है।

जब इतने सारे इनपुट हमारे अंदर जा रहे हैं तो हम कुछ अलग कैसे सो सकते हैं?

आज इंफॉर्मेशन ओवरलोड है लेकिन क्वालिटी ऑफ इंफॉर्मेशन पर ? Mark है।

कभी-कभी आप पॉजिटिव इंफॉर्मेशन का भी ओवरडोज ले सकते हैं। यह सूचना आपको हेल्दी बना सकती है। क्योंकि यह आपकी सोच पर असर करती है। हम जो खाते हैं उसके पोषक तत्व हमारे शरीर को बनाते हैं। उसी तरह सूचनाएं हमारे मन की सेहत और सोच को प्रभावित करती है। इंफॉर्मेशन इज़ दा रॉ मटेरियल जो हमारे अंदर जा रहा है।भोजन आपको सिर्फ सेहतमंद बनाता है। लेकिन सूचनाएं हमारे सोच पर असर कर रही है।फिर हम कहते हैं कि नेगेटिव सोचना तो नॉर्मल है। हम पॉजिटिव कैसे सोचे? मुद्दा यह है कि हमें सोच का सोर्स ही नहीं पता है। फिलहाल आपकी सोच का सोर्स है ‘सूचना’। इसके आधार पर ही आपकी सोच बन रही है। जिस तरह की सूचनाएं हमारे अंदर जाएगी उसी तरह की सोच बनेगी।

 

सूचना देने वाले का मकसद नेक होता है। वह हमें इनफॉर्म करना चाहते हैं। ये हम पर निर्भर करता है कि हम सिर्फ सुन रहे हैं या उसके बारे में बहुत ज्यादा सोच रहे हैं।

उदाहरण से समझें— मुझे पता है कि गाड़ी और स्कूटर बहुत ध्यान से चलाना चाहिए। चलाते भी हैं,क्योंकि हमें इंफॉर्मेशन दी गई है कि वो ध्यान से चलाना है। लेकिन सिर्फ एक दिन हम सिर्फ ये इंफॉर्मेशन लें कि हर रोज कितने एक्सीडेंट हो रहे हैं। पूरे विश्व में कितने एक्सीडेंट हो रहे हैं। अब तक देश में कितने एक्सीडेंट हो गए। अगले घंटे इस देश में कितना एक्सीडेंट हुआ। हमें पता है एक्सीडेंट होता है। हमें यह भी पता है कि गाड़ी कैसे चलाना है। इसके बावजूद अगर हम अपने मन में सिर्फ वही इंफॉर्मेशन भरेंगे तो एक्सीडेंट हो या ना हो अजीब सा डर हमारे अंदर जाएगा। जब भी गाड़ी स्कूटर चलाने निकलेंगे तो एक्सीडेंट की आशंका बढ़ जाएगी।रोज सुबह जब हम घर से निकलते हैं तब यह सोचकर गाड़ी नहीं निकालते कि कहीं एक्सीडेंट ना हो जाए। फ्लाइट में बैठते वक्त यह नहीं सोचते कि कहीं प्लेन क्रैश ना हो जाए। ट्रेन में बैठते वक्त यह नहीं सोचते कि ट्रेन डिरेल ना हो जाए। असली जिंदगी में कभी ना कभी किसी ना किसी के साथ यह सब कुछ होता है।

लेकिन ये सोचिए कि फिलहाल हम सब दिन भर क्या सोच रहे हैं?

यही कि हमें कहीं कोरोना ना हो जाए वजह है—इंफॉर्मेशन

न्यूज़ चैनल और सोशल मीडिया से हमें दिनभर इस से जुड़ी सूचना मिल रही है। सोचिए हम सारा दिन कौन से मैसेज भेज रहे हैं। हम 10 मिनट में कोई ना कोई शुभचिंतक बड़ी सुभभावना से यही मैसेज भेज रहा है कि आज केरोना से इतने लोग मरे, फलां जगह भी यह वायरस फैल गया,इतने लोग प्रभावित हुए, संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है, इस स्टेट में ये हो गया, कोरोना से फलां शहर में एक और डेथ हो गई।

तय हमें करना है कि यह सूचनाएं हमें लेनी है या नहीं और लेनी है तो कितनी।

 

नोट :— यह आर्टिकल लिखने का मकसद है के सब अपनी सोच को हम पॉजिटिव रखें।हम सबको पता है की हम अभी जिस माहौल में जी रहे हैं वहां डर बहुत ज्यादा है।यह सब निगेटिव इंफॉर्मेशन के कारण हो रहा है।पर जो हो रहा है उसे हम नकार भी नहीं सकते।

अगर हम सब डॉक्टर और सरकार की सलाह को मानते हुए अपनी सोच को पॉजिटिव रखें तो हम सब के लिए कुछ हद तक फायदा ही होगा।

“तो आइए आज से हम सब पॉजिटिव सोच के साथ आगे बढ़े”।

 

 

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