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Invest in times of crisis, but with caution and caution

कोरोना संकट के समय में निवेश करें पर सतर्कता और सावधानी से

 

आज हर तरफ कोरोना वायरस की चर्चा है। देश में लॉकडाउन 48 दिन से आगे बढ़ चुका है। सभी तरह के कारोबार और आर्थिक गतिविधियां बंद हो चुकी है। पूरी दुनिया अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक मंदी का सामना कर रही है। भारतीय अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई है। ऐसे में निवेशकों में चिंता अधिक है। वैसे निवेशक जो अब तक लगातार निवेश करते आ रहे थे उनके मन में भय हैं। सभी तरह के निवेश अभी नेगेटिव रिटर्न दिखा रहे हैं। निवेशकों को समझ में नहीं आ रहा है कि ऐसी स्थिति में क्या करें?

 

किसी को नहीं पता कि कोविड-19 की वजह से ग्लोबल इकोनॉमी को कितना नुकसान होगा। इसको लेकर दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों बीच तरह-तरह के मतांतर है। आंकड़ों के अनुसार 2020 में ग्लोबल इकोनॉमी में कमी कम से कम 2.4% की कमी आएगी। और यह जो सबसे बड़ा नुकसान इकोनॉमी में होगा। वह मांग की कमी वजह की से होगा।

इसका मतलब यह हुआ कि उपभोक्ता इसके सेवाओं को लेने वाले नहीं होंगे। जैसे लो हवाई जहाज की यात्रा करना चाहते हैं पर जहाज नहीं है, लोग बाहर खाना चाहते हैं पर रेस्टोरेंट नहीं है इसका मतलब यह हुआ कि कंपनियां अपने नुकसान को कम करने के लिए नौकरियां में कटौती करेगी।और यह जो बेरोजगारी बढ़ेगी। वह मांग को और भी कम करेगी इसलिए कहा जाता है कि वैश्विक मंदी कहीं ग्रेट डिप्रेशन की तरह ना हो जाए।इनमें आशा की किरण यही है। जो सरकार ने इस तरह के संकटों से यह सीखा है कि बाजार में आए इस मंदि को सरकारी खर्चों से कुछ हद तक बांटा जा सकता है।इसलिए देखने में मिलेगा की बहुत सारी सरकारें अपनी योजनाओं से लोगों के घर तक पहुंचने की कोशिश करेगी और इस क्राइसिस इसमें कुछ सेक्टर जिसे फायदा मिलेगा।जैसे कि ई-कॉमर्स फूड, रिलेटेड बिजनेस और हेल्थ केयर इंडस्ट्रीज में कुछ नए अवसर आएंगे जो इस मंदी को कुछ हद तक कम करने में सफल होगी।इस बार की आर्थिक मंदी बाकी मंदियों से अलग है। क्योंकि यहां लोगों को घर में बंद किया गया है। यह क्रियेटेड मंदी है।इंडस्ट्रीज को बंद किया गया है। डिमांड को पोस्ट- पोन किया गया जानबूझकर टाला गया है। इसका यह तात्पर्य हुआ कि जैसे ही इकोनॉमीमी खुलेगी हमें कुछ हद तक वापस लोग दुकान में मिलेंगे और सुधार में तेजी आ सकती है।

 

कैश इज द किंग

दुनिया में जब भी इस तरह की मंदी आयी है या हमेशा से रहा है कि जिसके पास भी नगदी या कैश इक्वीवैलेंट रहा है। वह हमेशा फायदा में रहा है। अगर आपके पास नगद है तो आपको स्ट्रेटिजी बनाने में तरलता रखने और निवेश के नये मौके आने पर सही निवेश के फैसले लेने में आसानी होती है। जो आगे चलकर बहुत ही लाभकारी होता है।

 

कंटीजेंसी फंड

शुरू से ही समाज में कंटीजेंसी फंद का बहुत प्रचलन है। जिन लोगों ने भी इनकी अहमियत को नहीं समझा है उन्हें अब समझ में आ रहा होगा। कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए अचानक से आए लॉकडाउन की वजह से वैसे लोग जिन्होंने कंटीजेंसी फंड अर्थात कैस रखा होगा उन्हें कम परेशानी हुई होगी बजाय वैसे लोगों को लोग जिन्होंने सारा पैसा निवेश कर रखा है।

 

रिटर्न के पीछे ना भागे

मंदी आती है लोग भावात्मक निर्णय ज्यादा लेना शुरू कर देते हैं और जल्दी रिटर्न के चक्कर में नुकसान कर बैठते हैं। साडे एजेंट क्लास जैसे कि गोल्ड, इक्विटीज, डब्ट फंड, रियल एस्टेट और कमोडिटीज निवेश के अच्छे अवसर के रूप में दिखने लगते हैं। पर बिना जोखिम को समझे ज्यादा रिटर्न पाने के चक्कर में फस जाते हैं।

 

   वेट एंड वाच

देखे सोचे और समझकर ही निवेश करें। थोड़ी और ज्यादा फायदे के चक्कर में लिया गया कोई भी फैसला घातक और नुकसानदेह भी हो सकता है। इस तरह की घटना सदी में एक बार ही होती है। इसको समझने वाले इसका सही विश्लेषण करने वाले और इसका सही ऑउटकम बतलाने वाले बहुत कम लोग होंगे। यह समय धैर्य, विवेक और अनुशासन का है।

 

जरूरी है हेल्थ इंश्योरेंस

इस महामारी में एक चीज देखने को मिली है कि हेल्थ इंश्योरेंस का होना बहुत जरूरी है। क्योंकि अचानक आई इस बीमारी से हर आदमी ग्रसित होकर हो सकता है।जो लोग अभी तक यह सोचते आए हैं कि मैं स्वस्थ हूं और मुझे कोई बीमारी नहीं हो सकती है और उन्हें हेल्थ इंश्योरेंस नहीं कराया। उनके लिए बीमारी एक सबक है इसलिए अपने और अपने परिवार के लिए हेल्थ इंश्योरेंस जरूर करवाएं।

 

नोट:— इन बातों से हमें यह समझ आया है कि हमें इन्वेस्ट करना चाहिए पर कुछ कैश अपने हाथों में जरूर रखना चाहिए। ताकि कोई भी मुसीबत के समय वह काम आए

 

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