Healthy Life

Healthy life(स्वस्थ जीवन)

विटामिन डी शरीर को पोषण देने वाला ऐसा तत्व हैजो मुख्य रूप से शरीर को कैल्शियम देने में मदद करता है। कैल्शियम हड्डियों के निर्माण और उसकी मजबूती के लिए बहुत जरूरी होता है। इसके अलावा विटामिन डी हमारे रोग प्रतिरोध क्षमता को बनाये रखती है। हमारे मांसपेशी के निर्माण में और दिमाग केनर्वस सिस्टम को सही रूप से चलाने में भी विटामिन डी का बहुत बड़ा योगदान होता है

विटामिन डी की कमी के मुख्य कारण :-

सूर्य की किरणें हमारे शरीर में विटामिन डी की पूर्तिके लिए सबसे आसान और सस्ता तरीका है। आज हमारे जीवन शैली बंद कमरे के अंदर बिताने वाली हो गई है। हम अपने बच्चों को स्कूल और कॉलेज के अलावा बाहर नहीं भेज धूप में खेलने नहीं देते जिस के कारण विटामिन डी की कमी हो जाती है।

आजकल बच्चे बाहर क्रिकेट फुटबॉल कबड्डी खेलने के बजाय मोबाइल और कंप्यूटर पर वीडियो गेम खेलना ज्यादा पसंद करते हैं जिसके कारण विटामिन डी की कमी हो जाती है। आजकल के बच्चों पर पढ़ाई का बोझ इतना डाल दिया गया है कि कोचिंग से टाइम ही नहीं मिलता औरघर का पौष्टिक आहार खाने के बजाय बाहर ही मजबूरी में खाना पड़ता हैजिसके कारण बाहर के भोजन में विटामिन डी और कैल्शियम युक्त भोजन नहीं मिल पाता है। और धीरे-धीरे उनके शरीर में पोषक तत्व की कमी हो जाती है जो बढ़ती उम्र में दिख जाता है 35 से 40 वर्ष में। कई बार विटामिन डी के कमी से डायबिटीज और मोटापा भी परेशान करती है।

विटामिन डी की कमी के लक्षण :-

विटामिन डी की कमी के कई लक्षण होते हैं। हड्डी में दर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमर में दर्द, बीपी बढ़ना, आष्टीपोरोसिस, रिकेट्स ( बचचो में) बार बार इन्फेक्शन होना इसी कमी को चेक करने के लिए 25OH विटामिन डी टेस्ट किया जाता है। यह टेस्ट ज्यादा महंगा नहीं होता 1400 से 2000 तक हो जाता है। यदि विटामिन डी का लेवल 20ng/ml ( 50 nmol/l) से कम हो तो उसे क्रिटिकल कंडीशन कहा जाता है। 21-29ng/ml हो तो उसे कम और 30-60 ng/ml तक हो तो उसे सही माना जाता है।

अगर 100ng/ml से ज्यादाइसका लेवल हो तो उसे टॉक्सिक या हानिकारक लेवल माना जाता है ng/ml और nmol/l दो मात्रा है। अलग अलग लैब में अलग अलग मात्रक उपयोग किया जाता है। nmol/l के रीडिंग को 2.5 से भाग देने पर ng/ml की रीडिंग आ जाती है।

 

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