Filaria disease

फाइलेरिया की बीमारी देश के 20 राज्यों के 250 से अधिक जिलों में महामारी की तरह फैली है यह बीमारी एलीफेंटिटिस परजीवी के कारण फैलती है। जो मच्छर के काटने से शरीर के अंदर प्रवेश करता है। इससे मरीज के पैर हाथी के पैरों की तरह फूल जाते हैं। इस रोग से शारीरिक विकलांगता हो सकती है। अतः आसपास मच्छर न पनपने दें बचाव के उठाए कदम।

 

फाइलेरिया वुकलेरियो बैंक्राफ्टी, ब्रुजिया मलाई जैसे फिलाइरिया परिवार के धागे की तरह पलते पैरासाइट worms के कारण होती है । इसके लाडवा को एक इंसान से दूसरे तक कुलेक्स मच्छर से फैलाते हैं। ये पैरासाइट हमारे शरीर में अपना पूरा जीवन बिताता है।मच्छर के जरिए एक से दूसरे व्यक्ति में संक्रमित होते रहते हैं 10— 14 दिन केइन्क्यूबेशन पीरियडके बाद ये लारवा संक्रमण के लिए तैयार हो जाते हैं। जब यह संक्रमित मच्छर दूसरे व्यक्ति को काटता है तो मच्छर में मौजूद संक्रमित लारवा दूसरे के शरीर में पहुंच जाते हैं।कुलेक्स मच्छर के काटने पर पैरासाइट के माइक्रो फैलेरिया लारवा हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं। यह लारवा हमारे शरीर में लिंम्फेटिक सिस्टम कि ग्रंथियों में जमा हो जाते हैं।जहां यह माइक्रोफैलेरिया लारवा बहुत तेजी से बढ़ते हैं और खून में फैलते रहते हैं। यह लिंम्फेटिक सिस्टम में संक्रमित फैलाते हैं और उसके कार्यों में बाधा डालते हैं।रक्त में पहुंचकर सफेद रक्त कोशिकाओं को नष्ट करने लगते हैं और हमारे इम्यून सिस्टम को प्रभावित करते हैं। जागरूकता और मेडिकल सुविधाओं के अभाव में इसे काबू करना मुश्किल हो जाता है। लिम्फेटिक सिस्टम के अलावा यह आसपास केटिशूज और अंडकोष जननांग में सूजन लाता है हाइड्रोसील इफेक्ट होने पर कई बार ये सूजन इतनी बढ़ जाती है कि वह एलिफैंसिस के रूप में ले लेता है जो शारीरिक विकलांगता का रूप ले लेता है।

 

फाइलेरिया की जांच

फाइलेरिया की जांच कई तरीके से की जाती है इसमें सबसे प्रमुख है पेरीफेरल ब्लड टेस्ट इसमें ब्लड में माइक्रोफाइलेरिया या फाइलेरिया पैरासाइट्स की जांच की जाती है।यह आइडियल टेस्ट है पर इसके लिए ब्लड कलेक्शन का समय महत्वपूर्ण होता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि रात के समय जब शरीर आराम की मुद्रा में होता है तो माइक्रोफैलेरिया लारवा के सैंपल पॉजीटिव आने की संभावना अधिक होती है।दूसरी जांच होते ही यूरिन की फाइलेरिया से संक्रमित कई लोगों का यूरिन सफेद दही की तरह होता है। अतः इसमें भी फैलेरिया की आशंका होती है और मरीज को तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए यूरिन की इस बीमारी को काइलेरिया कहा जाता है। यह काइलस फ्लूइडपेट, छाति या यूरिन तीनों में जमा हो सकता है जो खतरनाक भी हो सकता है। हालांकि इस फ्लूइड का सैंपल लेकर फाइलेरिया के लारवा की जांच आसान है। इसके अलावा एंटीजेन डिडक्शन, सीटी स्कैन, एमआरआई स्किन की जांच भी की जाती है।

 

नोट :—कोई भी बीमारी हम पर तभी हावी होती है जब हम उसे नजरअंदाज कर देते हैं और बाद में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

 

 

12 Comments on “Filaria disease”

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