Corona’s effect on the workers as well

Corona’s effect on the workers as well

          कोरोना का असर मजदूरों पर भी

 

कोरोना वायरस को लेकर पिछले कुछ दिनों से आम लोग अदृश्य भय और आतंक के साए में जी रहे हैं।पीएम की अपील के बाद आम और खास सभी अपने घरों में कैद हो गए हैं। बस ट्रेन ऑटो यहां तक कि रिक्शा भी बंद है। आलम यह है कि जहां सड़कों पर सन्नाटा पसर गया है। वहीं बाजारों में वीरानी छाई हुई है। यह अलग बात है कि कोरोना का असर समाज के सभी वर्गों पर पड़ा है लेकिन एक ऐसा तबका भी है जिस पर आफत का पहाड़ टूट पड़ा है।

दिहाड़ी मजदूरों पर तो रोजी रोटी का मार पड़ रही है। सड़क किनारे बेचने वाले छोटे-छोटे दुकानदारों को बहुनी पर भी आफत आ गई है।कुछ ऐसे लोगों से बात कर या पड़ताल करने की कोशिश की है कि जिंदगी और मौत के बीच जारी जंग में ऐसे लोग कैसे जी रहे हैं?

रिक्शा वाला:— एक रिपोर्ट 52 वर्षीय सुरेंद्र पासवान की जिंदगी एक रिक्शे पर चलती है। रोज कमाता है तो खाता है। घर में पत्नी के अलावा उसके दो बेटी और एक बेटा है। पूरे परिवार का भरण पोषण की जवाबदारी अकेले सुरेंद्र पर है।वह बताता है कि जब से या हल पैदा हुआ है तब से घर की परेशानी बढ़ गई है। रोज दो ढाई सौ कमाने वाला सुरेंद्र को शाम तक ₹100 भी नहीं बच पाता है। सुरेंद्र चिंतित है कि अगर यही हाल रहा तो घर चलाना मुश्किल हो जाएगा।

फल बेचने वाला:— ठेले पर फल बेचने वाला भी चिंता है कि ग्राहक के अभाव में अब उसके फल सड़ने लगे है। संतरा और सेब रखे रखे खराब हो जा रहे हैं। वह बताता है कि दिन भर में संतरा, सेब और अंगूर इतना जरूर बेच देता था जिससे उसके घर का खर्च निकल जाता था। लेकिन इधर 1 सप्ताह से बिक्री कम हो गई है।

 

चाट बेचने वाला:— कालू नाम का एक व्यक्ति बस स्टैंड में चाट की दुकान करता है। सामान्य स्थिति में उसकी दुकान में ग्राहक हमेशा भीड़ लगी रहती थी लेकिन आज वहां सूना पड़ा है।कालू ने बताया कि जब बस ही नहीं चलेगी तो ग्राहक आएंगे कहां से अब क्या करेंगे? उसने बताया कि दुकान बंद करने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है।

 

चाय वाला:— इसी बस पड़ाव में रामू नाम का व्यक्ति पिछले 10 साल से चाय बेचता है।इसी से उसका घर चलता है। पत्नी भी इसमें सहयोग करती है पिछले 2-4 दिनों से उसकी आमदनी इतनी घट गई है कि दूध और चाय पत्ती का भी पैसा नहीं निकल पा रहा है। वह सवालिया लहजे से पूछता है कि यह हालात कब तक रहेगा? पर जवाब कुछ भी नहीं।

 

मजदूर:— सुलेमान नाम का मजदूर मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालता है। इधर से काम नहीं मिल पा रहा वह कहता है कि कोरोना से तो बाद में उसके पहले ही उसकी जैसे लोग भूख से मौत के मुंह में चले जाएंगे।दिन भर काम की तलाश में खड़ा रहते हैं। काम के इंतजार में खड़े खड़े घंटे बीत गए लेकिन काम नहीं मिला। लाचार होकर अब घर जाना पड़ता है। एक-दो दिन से यही हाल है घंटों इंतजार कर वापस लौट जाना पड़ता है।

 

नोट:— क्या कहें कुछ समझ में नहीं आ रहा हमारे पास शब्द ही नहीं है ? इन सवालों का कोई जवाब दें।

सारी दुनिया कोरोना वायरस से परेशान है। मर रही है, डर रही है के न जाने अब क्या होगा, कल क्या होगा।

बस हम सब ईश्वर से दिल से प्रार्थना करें कि इस मुसिबत को जल्द से जल्द खत्म करने की कृपा करें!!!

 

 

 

One Comment on “Corona’s effect on the workers as well”

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