Children suffering from autism

Children suffering from autism can also lead a normal life

ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे भी जी सकते हैं सामान्य जीवन

 

ऑटिज्म रोग से ग्रसित बच्चे का मानसिक विकास ठीक तरह से नहीं हो पाता। इस बीमारी से जूझ रहे बच्चे दूसरे लोगों के साथ घुलने मिलने में कतराते हैं। ऐसे बच्चे अपने प्रतिक्रियाएं देने में भी काफी समय ले लेते हैं।इस बीमारी का अभी वास्तविक कारण पता नहीं लग पाया है। लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि आर्टिज में की बीमारी जींस के कारण भी हो सकती है। इसके अलावा वायरस जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी भी ऑटिज्म को जन्म दे सकती है। एक स्टडी में बताया गया है कि पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) से पीड़ित महिलाओं के पैदा होने वाले बच्चों में ऑटिज्म विकसित होने की अधिक आशंका रहती है।

इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान महिला में किसी बीमारी या पोषक तत्व की कमी भी शिशु को इसका शिकार बना सकती है।इसे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के रूप में भी जाना जाता है।

 

यह भावनाओं और समझ को व्यक्त करने में मस्तिष्क की अक्षमता के कारण होने वाला व्यवहार विकार है। इससे पीड़ित बच्चे कई प्रकार के लक्षण और व्यवहार प्रदर्शित करते हैं।

 

उनमें कुछ सामान्य रूप से देखे गए कारण है जैस—:

1:— दूसरों के साथ आंख ना मिलाना।

2:— मोटर स्किल्स की समस्या होना।

3:— शारीरिक संपर्क और स्पर्श जैसे कुछ ट्रिगर के प्रति संवेदनशील।

4:— अपनी भावनाओं को व्यक्त करने और अन्य लोगों की भावनाओं या शब्दों को समझने में असमर्थ।

 

कुछ बच्चों में इनमें से कुछ ना कुछ बच्चों में सभी लक्षण मिल सकते हैं।

कुछ अन्य आसान संकेतों से आप पता लगा सकते हैं कि आपका बच्चा 6 महीने की उम्र में ही स्पेक्ट्रम पर है या नहीं।

जैसे— पुकारने पर प्रतिक्रिया ना देना, खेलने कूदने या दूसरे बच्चों से घुलने मिलने में रुचि ना लेना, छोटी सी बात चिढ़ जाना और रुक रुक कर बोलना आदि।

यदि आपको कोई लक्षण दिखे तो चिकित्सक से संपर्क करें शिशु में अजीब व्यवहार को पहचानने से अच्छा है कि उसका व्यवहार नॉर्मल है या नहीं यह पहचाने।

 

ऑटिज्म का इलाज

 

ऑटिज्म का इलाज आसान नहीं। लेकिन बच्चे को ठीक करना नामुमकिन भी नहीं। सबसे पहले बच्चे की स्थिति और लक्षण देखते हुए डॉक्टर बच्चे की जांच करेगा। फिर जांच के आधार पर इलाज तय करेगा। इलाज के शुरुआत में बच्चे को बिहेवियर थेरेपी, स्पीच थेरेपी और एक्यूप्रेशर थेरेपी दी जाती है।इस दौरान बच्चे की भाषा में बात कर उसके दिमाग के विकास पर काम किया जाता है। ध्यान रखें कि जितनी छोटी उम्र में बच्चे में इस रोग का पहचान होगा और इन सभी थेरेपीज पर ठीक से काम किया जाए तो बच्चे को काफी हद तक ठीक करना संभव है। इसलिए माता-पिता को सलाह दी जाती है कि वह बच्चे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं उसके हाव-भाव को समझे जरूरत पड़ने पर मेडिकेशन की सलाह दी जा सकती है। ऑटिज्म से पीड़ित बच्चा भी सामान्य जीवन जी सकता है।

 

नोट :— ज्यादातर देखा गया है कि आजकल माता-पिता अपने अपने कामों में इतने व्यस्त हैं कि बच्चों पर ठीक से ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। जिसके कारण ये सब परेशानी बच्चों में हो रही हैं।

 

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