Ashtam Disease and Treatment

अस्थमा के लक्षण बचाव और आयुर्वेदिक औषधि
असलम और एलर्जी के मरीजों के लिए बदलता मौसम काफी हानिकारक होता है। जब मौसम बदलता है तो धूल उड़ती है और वही धूल असथमा और एलर्जी का कारण होता है। वैसे भी वातावरण में एलर्जी किसी न किसी करण फैलती ही जा रही है और मरीजों की संख्या भी बढती जा रही है।
कया होता है असथमा:
श्वास नली में सूजन से चिपचप (खसखस) बलगम का जमा होना और बलगम न के बराबर निकलता है और श्वास नली इसी कारण सख्त हो जाता है और श्वास लेने में दिक्कत होती है। इसे ही असथमा कहते है। असथमा किसी को भी किसी उम्र में हो सकता है चाहे वो बच्चा, जवान या बूढ़ा कयो न हो
असथमा के लक्ष्य :-
बार बार खासी होना, सांस लेते समय आवाज होना एक सीटी की तरह, सीने में जकड़न, दम फूलना, खांसी के साथ बलगम का न निकलना और एक बेचैनी के तरहा होना।
बचाव ही सही इलाज है :-
(1) धूल, मिट्टी, धुआँ, प्रदूषण होने पर मुंह और नाक को कपड़े या मास्क से ढके और सिगरेट से से या सिगरेट के धुएं से दूर रहे।
(2) ताजा पेंट, कीटनाशक स्प्रे, अगरबत्ती, मच्छर भगाने का काइल का धुआँ।
(3) किसी भी फलेवर, एसेंस और कोल्ड ड्रिंक आदि से।

असथमा में असरदार जड़ीबूटी :-
1. वासा :- ये सूकड़ी हुई श्वास नली को फैलाने में काम आती है।
2. कंटकारी :- यह गले और फेफड़े में जमे हुए चिपचिपा पदार्थ यानि कफ को दूर करने में मदद करती है।
3. पुष्कामूल :- इसमें एंटी बैक्टीरियल गुण भरपूर मात्रा में होता है जो कफी मददगार साबित होता है और
4.यष्टिमधु :- ये भी गले को साफ करने में काफी मदद करता है।

विश्व असथमा दिवस
हर वर्ष मई महीने के मंगलवार को पूरे दुनिया में “ विश्व असथमा दिवस “ (Wild Asthma Day) मनाया जाता है।
बढ़ते प्रदुषण और बिगड़ते जिने के तरिके ने आज दुनिया भर में असथमा के मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। जब तक लोग इस बिमारी को समझ पाते तब तक ये भयानक रूप ले लेता है। इन ही कारणों को देखते और समझते “विश्व असथमा दिवस” मनाने की शुरुआत की गई ताकि लोग इस बिमारी को समझ सके और सही समय पर इस बिमारी का इलाज करा सके। मौसम के बदलते ही बच्चों में एलर्जी और असथमा के लक्षण दिखते है। मध्यम वर्ग के लोगों में 5 से 10% एलर्जी और असथमा होते ही है।
बदलते जीने का तरीका हमारे युवाओं को खतरे के ओर ढकेल रही है। इंडोर गेम बढ़ रहा और खेल का मैदान घट रहा जीस के कारण युवाए असथमा के मरीज हो रहे है। अब हालात ऐसे हो गए है कि जयादा तर असथमा के मरीज “ बच्चे और युवा है “।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक हम युवाओं के लिए जीने का सही तरीका नहीं चुनेंगे तब तक ये परेशानी बढ़ती रहेगी। AC कमरे में रहने वाले युवा जब अपने कमरे से बाहर निकलते है कामों के लिए तब बदलते वातावरण के कारण एलर्जी की शुरुआत होती है और वायरल इंफेक्शन से भी असथमा की शुरुआत होती है। बार बार जुकाम और बुखार होना एलर्जी होना का संकेत देती है। सही समय पर इलाज कराना और जीने का सही तरीके अपनाकर इस एलर्जी और असथमा से बचा जा सकता है।
घरेलू उपचार
1.अदरक का एक चम्मच रस एक कप मेथी के काढ़े और स्वाद के लिए शहद मिलाए और असथमा के मरीज को दे काफी फायदा मिलेगा।
2. मेथी के काढ़े के लिए एक चम्मच मेथी को एक कप पानी में 10-15 मिनट उबाले और हर रोज सुबह और शाम देने से फायदा मिलता है।
3. लहसुन भी असथमा के मरीजों के लिए असरदार है। 30 मिली ली. दूध में रोज सेवन करने से फायदा मिलता है।
4. अदरक वाली गर्म चाय में लहसुन की 2 कली को पिस कर डाल दे और गर्म गर्म पिने से फायदा मिलता है।
4-5 लौंग को 125 मिली ली. पानी में 5 मिनट उबाले और इसे छान कर शुद्ध शहद मिलाए और हर रोज सुबह शाम लेने से काफी फायदा मिलता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *